मोदी सरकार और वक्फ बोर्ड बिल: एक व्यापक दृष्टिकोण और पहले कार्यकाल की प्राथमिकताएँ
जब हम नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल (2014-2019) की बात करते हैं, तो एक आम आलोचना सामने आती है कि सरकार ने वक्फ बोर्ड संशोधन या समाप्ति से जुड़ा कोई विधेयक संसद में क्यों नहीं लाया। लेकिन इस प्रश्न से पहले यह समझना ज़रूरी है कि किसी भी सरकार का कार्यकाल योजनाबद्ध होता है, और प्राथमिकताएँ तत्कालीन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप तय की जाती हैं।
क्या घर बनाते समय छत पहले डालते हैं?
इस विषय को समझने के लिए एक सरल उदाहरण लेते हैं — क्या आप जब घर बनाते हैं तो सबसे पहले छत डालते हैं? नहीं। पहले एक परिकल्पना होती है, नक्शा बनता है, बजट बनता है, फिर एक-एक कर के दीवारें खड़ी की जाती हैं। उसी तरह, जब मोदी सरकार 2014 में सत्ता में आई, तो सबसे पहले देश की व्यवस्था को समझना और उसकी जड़ में व्याप्त पुरानी लुटियंस व्यवस्था, ब्यूरोक्रेसी की पकड़, और स्पॉयलर्स (जो जानबूझकर खेल बिगाड़ते हैं) से निपटना पहली जरूरत थी।
मोदी सरकार की प्राथमिकताएं: 2014 के बाद देश को दिशा देने वाले कदम
1. जन-धन योजना: पहले बजट (जुलाई 2014) में ही सभी नागरिकों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के लिए योजना लाई गई।
2. स्वच्छ भारत मिशन (अक्टूबर 2014): भारत को खुले में शौच से मुक्त करने की दिशा में क्रांतिकारी कदम।
3. Make in India: देश को विनिर्माण हब बनाने की दिशा में मजबूत अभियान।
4. राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC): पारदर्शिता हेतु सुधार, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
5. तीन तलाक कानून, GST, आधार, दिवालिया कानून: लंबे समय से रुके बड़े-बड़े सुधार, जिनकी संवैधानिक प्रक्रिया बेहद जटिल थी।
6. नोटबंदी और डिजिटल भुगतान: कालेधन पर करारा प्रहार और डिजिटल इंडिया की नींव।
7. बैंकिंग सुधार: 27 बैंकों का विलय कर 12 मजबूत बैंक बनाना।
8. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान: सामाजिक परिवर्तन की दिशा में अहम प्रयास।
स्वास्थ्य समस्याओं और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति की चुनौतियाँ
पहले कार्यकाल में ही तीन प्रमुख मंत्री - अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, और मनोहर पर्रिकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, फिर भी देश की गाड़ी रुकी नहीं।
मोदी जी ने नेपाल, भूटान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे अनेक देशों की यात्राएं कर भारत की वैश्विक छवि को नए स्तर पर पहुंचाया। क्वाड (QUAD) में भारत को शामिल कर एक पैसिफिक शक्ति के रूप में दुनिया ने मान्यता दी।
दूसरे कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियाँ
अनुच्छेद 370 हटाना और जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन
CAA (नागरिकता संशोधन अधिनियम)
न्याय संहिता का पास होना
राम मंदिर निर्माण
वन रैंक वन पेंशन और अग्निवीर योजना
तीन सर्जिकल स्ट्राइक और चीन को जवाब
कोविड महामारी के दौरान मजबूती से नेतृत्व
सैकड़ों भारतीय नागरिकों की विदेश से वापसी (यमन, यूक्रेन, सूडान)
25 करोड़ लोग घोर निर्धनता से बाहर लाए गए
वक्फ बोर्ड विधेयक: प्राथमिकता क्यों नहीं बनी?
जब देश आर्थिक रूप से जर्जर स्थिति में हो, सीमाओं पर चुनौतियाँ हों, न्यायपालिका में पारदर्शिता की कमी हो, लाखों करोड़ के बैंक घोटाले सामने आए हों — तब किसी भी समझदार सरकार को सर्वप्रथम नींव मजबूत करनी होती है।
आज देश हर घर जल, हर घर शौचालय, हर गरीब को गैस कनेक्शन, डिजिटल पेमेंट में दुनिया में अग्रणी बन चुका है। ऐसे में पहले दस वर्षों में अगर वक्फ बोर्ड पर सीधे प्रहार नहीं किया गया, तो यह रणनीतिक विवेक था, न कि असफलता।
निष्कर्ष:
मोदी सरकार ने पहले कार्यकाल में जिन बुनियादी सुधारों की नींव रखी, वह आज भारत के मजबूत लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था और वैश्विक पहचान का आधार बन चुकी है। वक्फ बोर्ड जैसे मुद्दों पर भी काम होगा — लेकिन पहले घर की नींव मजबूत होनी चाहिए, छत बाद में आती है।
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